Thursday, 5 November 2015

एक बारीश थी

एक बारीश थी


एक बारीश थी
एक  तुम थे
एक  भीगा भीगासा
हमारा मन भी था

थोडी गीलीसी यादे थी
 थोडी बारीश कि  बुंदे  थी
अब के फिर से वोह बारीश है
तुम हो,  हम है
बस भीगासा मन कही खो गया है
वो गिली यादे  छुप गयी है
वो बुंदे कही बेह गयी है
चलो फिर से बारीश को अपना ले

थोडा फिर से  जी ले  थोडी नयी यादे बना ले
और फिर अगली बारीश का इंतजार कर ले
-शीतल 

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