दो चार हि शब्दो में खत्म हो
ऐसी कोई कहानी है तो बताओ
ऐसी कोई कहानी है तो बताओ
या फिर मै ये कह दु कि
जिंदगी कि कोई दास्ता नही होती
जो शुरू और खत्म हो
कही ना कही
जिंदगी कि कोई दास्ता नही होती
जो शुरू और खत्म हो
कही ना कही
ये तो बस इक सफर है,
ना है मंज़िल कोई पता
ना जानू मैं कोई रास्ता
ना है मंज़िल कोई पता
ना जानू मैं कोई रास्ता
बस चलते जाना है युही
दिल में मोहब्बत लिये
गिलें शिकवे छोडकर
इसके हर इक मोडपर
दिल में मोहब्बत लिये
गिलें शिकवे छोडकर
इसके हर इक मोडपर
ना कोई कहानी बनेगी
ना को अफसना बनेगा
बस उलझ जायेंगे हम
कुछ अनकहे अल्फाजो में
ना को अफसना बनेगा
बस उलझ जायेंगे हम
कुछ अनकहे अल्फाजो में
और पहोच जायेंगे कही ना कही
जीवन के इस सफर में
शीतल
जीवन के इस सफर में
शीतल
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