वो प्रपात थी टूट पड़नेवाली
और वह उसको समेटने चाह रहा था
दो हथेलियों में
और वह उसको समेटने चाह रहा था
दो हथेलियों में
तूफ़ान थी वो
और वह उसको कैद करना चाह रहा था
अपनी बाहों में
और वह उसको कैद करना चाह रहा था
अपनी बाहों में
कैसे मुमकिन था ये
उलझन में फस गया वह , किसको बताऊँ?
उसकेबिना कोई और समझ भी तो नहीं पायेगा
ये उलझन!
उलझन में फस गया वह , किसको बताऊँ?
उसकेबिना कोई और समझ भी तो नहीं पायेगा
ये उलझन!
आखिर वोही कह पड़ी
"हथेली और बाहें
दोनों में जखड़ ही जायेंगे हम"
"हथेली और बाहें
दोनों में जखड़ ही जायेंगे हम"
"लेकिन में करू भी तो क्या?
तुम्हारा साथ चाहता हूँ बस "
वह रो पड़ा
तुम्हारा साथ चाहता हूँ बस "
वह रो पड़ा
वो धीरे से हंसी , पास आयीं
"थोड़ा सा अपने मन में झांक कर तो देखो,
शायद मेरे लिए थोड़ी जगह हो , और थोड़ा समय भी,
थोडा और गेहेरा करके देखो दिल को,
फिर शांत होने के लिए,
आएगा तुम्हारे ही पास,
ये तूफान ,
साथ को ढूंढते हुए"
© sheetal/translation by Snehal.j
#hindikavita #poem #blog
"थोड़ा सा अपने मन में झांक कर तो देखो,
शायद मेरे लिए थोड़ी जगह हो , और थोड़ा समय भी,
थोडा और गेहेरा करके देखो दिल को,
फिर शांत होने के लिए,
आएगा तुम्हारे ही पास,
ये तूफान ,
साथ को ढूंढते हुए"
© sheetal/translation by Snehal.j
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