Sunday, 5 February 2017

तूफ़ान थी वो : #hindikavita #poem #blog

वो प्रपात थी टूट पड़नेवाली
और वह उसको समेटने चाह रहा था
दो हथेलियों में
तूफ़ान थी वो
और वह उसको कैद करना चाह रहा था
अपनी बाहों में
कैसे मुमकिन था ये
उलझन में फस गया वह , किसको बताऊँ?
उसकेबिना कोई और समझ भी तो नहीं पायेगा
 ये उलझन!
आखिर वोही कह पड़ी
"हथेली और बाहें
दोनों में जखड़ ही जायेंगे हम"
"लेकिन में करू भी तो क्या?
तुम्हारा साथ चाहता हूँ बस "
वह रो पड़ा
वो धीरे से हंसी , पास आयीं
"थोड़ा सा अपने मन में झांक कर तो देखो,
शायद मेरे लिए थोड़ी जगह हो , और थोड़ा समय भी,
थोडा और गेहेरा करके देखो दिल को,
फिर शांत होने के लिए,
आएगा तुम्हारे ही पास,
ये तूफान ,
साथ को ढूंढते हुए"
© sheetal/translation by Snehal.j
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