हवा में कुछ खुशबु सी है
रात भी ये महकती हुई
समा है शायद मोहब्बत का
और बस हम तुम और
कुछ अनकही बातें
थोड़े गिले शिकवे
और कुछ मीठी से यादे
रात भी ये महकती हुई
समा है शायद मोहब्बत का
और बस हम तुम और
कुछ अनकही बातें
थोड़े गिले शिकवे
और कुछ मीठी से यादे
कुछ ख़ामोशी के पल भी है
ये कहते हुए की
अनजान बन जाओ
फिर इक बार
इश्क़ कही सिर्फ आदत ना बन जाये हमारी
क्या पता ये रात ढलते ढलते
शायद ये प्यार फिर से हो जाये
©शीतल
ये कहते हुए की
अनजान बन जाओ
फिर इक बार
इश्क़ कही सिर्फ आदत ना बन जाये हमारी
क्या पता ये रात ढलते ढलते
शायद ये प्यार फिर से हो जाये
©शीतल
No comments:
Post a Comment