अनकही सी कुछ बाते
नज्म बन के निकली मेरे कलम से
सराहा तो बहोत सब ने, नज्म की तारीफ करते हुए
बस कोई रूबरू न हुआ, मुझे से
ना नज्म में छुपे हुए दर्द से
©शीतल
#हिंदीकविता #hindipoem
नज्म बन के निकली मेरे कलम से
सराहा तो बहोत सब ने, नज्म की तारीफ करते हुए
बस कोई रूबरू न हुआ, मुझे से
ना नज्म में छुपे हुए दर्द से
©शीतल
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