Tuesday, 24 January 2017

किरदार

कागज़ पे जब मैं लिखु
खुद का ही कोई अंश,
रूह से उतरा हुआ
तो वो किरदार बन जाता है
मेरा अपना सगा कोई
मैं रहू ना रहू इस दुनिया में
पर फिर भी मैं जिन्दा हूँ
मैं मेरे किरदारों में बसता हु
और वो तो मुझे में है ही
©शीतल

छोटे कोने मेँ

आसमाँ की आस लेके 
मैं गुजर रही हु इक छोटीसी गली से
कभी बादलों के उपर उड़ने की ख्वाइश
और कभी सिमट जाऊ मैं इक छोटे कोने मेँ
©शीतल जोशी

दो दीवाने

दो दीवाने क्या मिले
बातो की दास्ताँ हो गयी
प्यार के चंद लम्हों से
इक कहानी शुरू हुई
हर कहानी का जरुरी नहीं
की कुछ अंत भी हो
कुछ कहानीया बस
बहती रहे युही
मंज़िल की तलाश में
बस गुजरे ये ज़िन्दगी युँही
कुछ प्यार भरे पलो के साये में
सूरज की बाहों में चांदनी रातो में
और बस ये बाते हमारी युही चलती रहे
बहती रहे किसी अनजान मंज़िल की तपिश में
© शीतल

इंतज़ार है उस पल का जिस में रुबरु हो सकु रूह से और कर दू इज़हारे इश्क़ खुद से ही,



इंतज़ार है उस पल का
जिस में रुबरु हो सकु रूह से
और कर दू इज़हारे इश्क़
खुद से ही,
शायद जरुरी है खुद से भी प्यार करना
ताकि मेरी हस्ती भी बनी रहे,और ग़ुम ना हो जाये
किसी और के प्यार के लिये झगड़ते हुए
इंतजार है उस पल का जो कह दे मुझे से
हा मुझे मोहब्बत है मोहब्बत है अपने आप से भी
©शीतल जोशी

खूबसूरत

वैसे तू बहोत खूबसूरत लगती है मुझे
सीदे सादे घर के लिबास में ही
पर जब हलका सा काजल
तेरी आखो की गहराई बढ़ाता है
बहोत ही कमाल लगती है तू
सुबह की भाग दौड़ में
पता भी नहीं की कभी
आईने से बात होती भी है तेरी या नहीं
पर बिना आईना देखे कभी कबार
तू छोटीसी बिंदी लगा लेती है
बस गज़ब लगाती है तू
और कभी कभी किस्मत होती है
चूडियों की भी की तेरे हाथ पे सजे
वो चूडियों की खनखनाहट
मुझे सात सुरो से कम नहीं लगाती
क्या कहु, और भी अच्छी लगनी लगती है फिर तू
इक दिन सपने में आई तू
सारे गहने पाके बड़ी हसीन दिख रही थी
पर बिंदी फीकी लग रही थी आज
चूड़िया भी तो खामोश और गुमसुम सी
और काजल भरी आँखे
पानी से डबडबायी हुई
ये सपना टुटे तो ही अच्छा है
सच कहु तो खूबसूरत लगाती है तू
कमाल और गज़ब भी लगती है
जैसी है वैसे ही सीदे सादे लिबास में
खुद की हस्ती संभालती हुईं
और जब पहनती है
मासूम सी हँसी
तेरे लबो पर
कमाल लगती है और गज़ब ढाती है तू
©शीतल

इश्क़

इश्क़ किया था, ना कुछ माँगा इसके बदले में
सिर्फ थोड़ी सी वफा की तो ख्वाइश थी
और तुम चाँद का वादा कर के
सिर्फ रात का अँधेरा देके चले गये
फिर भी मैं ढूंढ लेती हूँ रोशनी का इक सिरा
और चल पड़ती हूँ इक नयी सुबह की तलाश में
आखिर तुम ही तो बस वो नहीं जिसने दर्द दिया
और भी कई दर्द है सीने में, झुलसते हुए
और कोई न सही, मेरी जिंदगी ही मेरी हमसफ़र है
और बहोत मोहब्बत है मुझे उससे इस कदर की
मेरे ग़म भी हँसते हँसते सह लुंगी और बस जी लुंगी
©शीतल

अल्फ़ाज़

अल्फ़ाज़ ढूंढ ही लेते है
अपनी राह खुद से ही
मैं तो बस जरिया हूँ
और मैं भी कहा और जाऊ उनके सिवा
वो भी तो जरिया है मेरा
मेरी रूह तक पोहचना का
©sheetal
#lovewriting #passionforwriting #meandmywords

मुझे इन्सां ही रहने दो

उसने कहा 
उसे रब दिखता है मुझमेँ
मैंने कहा मन ही मन में
रब की बाते छोडो और
मुझे इन्सां ही रहने दो
तुम्हारी तरह गलतिया करने की इजाजत तो रहेगी
©शीतल

आँसू और यादें

आँसू नहीं थे वो बस
जो आँखों से बहकर
चेहरे पर उतर आये थे
कई सारी यादें थी
जो छोटे से दिल में 
ना समेटी गयी
और दिल से सीधी
आँखों में उतर आयीं
बह जाने के लिए
©शीतल

#hidnipoem

प्यार व्यार

कौन कहता है की
प्यार व्यार सब झुठ होता है
सच मानो तो वो सब होता है
जो मोहब्बत की कहानी में होता है
उसे देखूँ तो पेट में तितलिया उड़ने लगती है
धूप  में वो साथ हो तो  धूप  भी छाँव  लगती है
जो आदते उसकी, कुछ जादा भाती नहीं  थी मुझे
वही सारी खामियां इश्क में  बड़ी प्यारी लगती है

उसके साथ भीगी हुई पहिली बारिश
मन में जानो सरगम बरसती है
उसके साथ बीती हुई हर श्याम
रात के ख्वाबो में सजती है
हा, ये सच है की ये किस्सा मोहब्बत का
बड़ी जल्दी करवट बदलता हा
आँसमा में उड़ने वाले प्यार पंछी
बड़ी जल्दी जमीन  आता  है

जिंदगी के रस्मो में रुसवाई, गिले शिकावे आ हि जाते है
वो हम से हम उनसे रुसवा भी होते है
प्यार आदत में बदल जाता है
और पता नहीं ये तितलिया कहा गायब हो जाती है

फिर भी, ये प्यार व्यार सब होता है
सच मानो जब ये होता है तो बस हो ही जाता है
©शीतल

अनुदिनी

नको असलेल्या सामनाच्या पसऱ्यात
काल एक जुनि अनुदिनी मिळाली
सहज एक पान उघडले
अन जणू काही यादीच
तुझ्याबद्दलच्या तक्रारीचि
अन पुढच्या पानावर साक्षाच
अपल्यातल्या गाढ़ प्रेमाची
डोळे जरा भरून आले
तू अचानक च आत आलास
आणि म्हणालास "काय झाले ग"
अन मी
"काही नाही रे, जरा अनुदिनी वरची धूळ झटकली
आणि आठवणी वरची पण"
न विसरता ती अनुदिनी ठेवली आहे
हव्या हव्यश्या जुन्या सामना मधे
© शीतल

ती सध्या काय करते?

ती सध्या काय करते? tinytale
पूर्वी ती खूप काय काय करायची
म्हणूनच मला आवडायाची
मीच मोठा झालो असे मला वाटले
अन ती मात्र त्याच नाजुक वयाच्या
वळणावर आहे असे समजून मागे सोडून आलो
ती जशी होती तशी मला हवी होती
पण झेपलिच नाही मला कधी ती
ती मला अजूनही आवडते
पण ती सध्या काय करते
नक्कीच ते सगळे करत असेल
जे तिला आवडत होते
खऱ्या अर्थाने जगणे समृद्ध असेल तिचे
कदाचित तीच मोठी झाली असेल आता
अन मी अजूनही त्याच वळणावर
घोटाळतो आहे शोधयाला की
ती सध्या काय करते
©शीतल sheetal
#तीसध्याकायकरते #tinytale #tisadhyakaykarate #marathishortstory #TSKK

अनकही

अनकही सी कुछ बाते
नज्म बन के निकली मेरे कलम से
सराहा तो बहोत सब ने, नज्म की तारीफ करते हुए
बस कोई रूबरू न हुआ, मुझे से
ना नज्म में छुपे हुए दर्द से 
 ©शीतल
#हिंदीकविता #hindipoem