Wednesday, 1 June 2016

पहिली बारिश

बारिश क्या हुई
मौसम ने करवट बदली
मै मै ना रही, तुम तुम ना रहे
कुछ गिली यादों में नजाने कहा
हम खो गये

काले घने बादल थोडे मन पे छा गये
और कुछ बुंदे बारिश कि
आँखो में सिमट गयी

बारीशे कितनी ना जाने
कही सारे पल बह के ले गयी
बस बह ना सके हम
तुम्हारे तरह वक्त के साथ

फिर बारिश आयेगी, नाचेंगी गाएगी
मेरे अंगने में  मिट्टी कि खुशबू खिलखीलयेगी
और मैं खडी रहूँगी उसी खिडकी में
राह देखते हुए उस बारिश कि
जो तुम्हे भी थोडा गिला कर दे
मेरे साथ, कुछ भिगे लमहो में

-शीतल

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